जिला - कोंडागांव
विधा -कविता
शीर्षक -संत कबीर
ढोंग आडंबर अंधविश्वास पर,
जिसने सबको सबक सिखाकर,
सकल सहज समरसता लाकर,
जड़ चेतन का भेद बता कर,
मन को शुद्ध स्वरूप बता वह,
बना रहा मदमस्त फक़ीर
वही है संत कबीर ।।
वाणी जिसकी अजरअमर,
भाषा जिसकी सरल-सहज,
सर्वधर्म समभाव बताकर,
जातिवाद का भेद मिटाकर,
निर्गुण भक्ति मार्ग दिखाकर,
शब्दों का कड़वा घूंट पिलाया,
वही संत कबीर कहलाया ।।
बना रहा फक्कडी़ वह तो ,
सधुक्कड़ी में दिया संदेश,
ज्ञान प्रेम का अलख जगा,
मानवता का दिया उपदेश,
बन बैठा संतों में श्रेष्ठ,
मानव मन में बना विशेष,
साखी ,सबद ,रमैनी गाकर,
ढाई आखर प्रेम सिखा कर,
सबको सच्चा मार्ग बताया,
वही संत कबीर कहलाया।।
मधु तिवारी
कोंडागांव
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