Thursday, June 4, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- बेटी का आँचल

कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
विषय-* *ईश्वर की बेटी का आंचल*
विधा-मुक्त छंद,,(वीर रस)

ईश्वर की बेटी है प्रकृति
जिनके इन्द्रधनुषी
 आंचल में छुपा है
अनमोल धरोहर
संस्कृति के मोती
संस्कार के टंके रत्न
नैसर्गिक सौंदर्य लिए
बेशुमार पुष्प।

जब -जब प्रकृति अपना
आंचल लहराए
हरी-भरी वन, सरसों की
सुनहरे विटप,धान
की सुनहरी बालियां
आंचल को खुशबू
से महकाते।

नीले आकाश तले
अलसी के टंके 
नीले पुष्प,नीला 
सागर धरती का
श्रृंगार  बढ़ाते।

ये मानव पर्यावरण को
दूषित कर आंचल
प्रकृति का स्याह न
करना, सतरंगी आंचल
में धरती खिल- खिल
जाती, स्वर्ग को धरा पर
उतार लाती, झरनों का
झर -झर मधुर
संगीत सुनाती।


मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग

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