जिला-कांकेर
शीर्षक-छत्तीसगढ़ महतारी
विषय-छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत
(उत्साह स्थायी भाव के साथ)
*छत्तीसगढ़ महतारी*
छत्तीसगढ़ महतारी
तोर लीला अब्बड़ भारी,
घेरी भेरी शीश नवावव
शस्य, श्यामला कोरा पियारी।
मलयाचल अस महमहाथे,
तन-मन फहराथे तोर
पुरवैया बड़ गुनकारी।
कौशिल्या माँ के संग
सबके बने महतारी,
तोर कोरा सुग्धर हे बड़ भारी।
महानदी,अऊ पैरी,सोंढूर
तोर अंगना मां लहर-लहर लहराए,बनगे तीरथ चारों
मुड़ा हमन बने हवन बड़ भागी।
सोनहा भुइयां
अब्बड़ सुग्घर,
धान कटोरा कहाये
तै महतारी।
वीर नारायण,
इंदरू केवट के
गाथा गावय इहाँ के
हर नर -नारी।
तोर भूइयां मा हीरा
मोती के खान,
लोहा पथरा बनके पिधलय
बने हे सब बर उपकारी।
डोगरगढ़,रतनपुर,
दंतेवाड़ा, तोर धाम,
महानदी के कुंभ
नहाएं सब नर-नारी।
हीरा- मोती,लोहा,
जंगल हवय तोर निशानी,
महल ,अटारी ,मनखे
बर बनगे वरदानी।
छत्तीसगढ़ महतारी
तोर लीला अब्बड़ भारी,
घेरी -भेरी शीश नवावन
शस्य,श्यामला कोरा पियारी।
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व्याख्या-उपरोक्त कविता में छत्तीसगढ़ महतारी की मिट्टी, हवा,नदियाँ,तीर्थ स्थानों, स्वतन्त्रता सेनानी,खनिज एवं जंगलों की महिमा गाई है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
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