Thursday, June 4, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- छत्तीसगढ़ महतारी

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
जिला-कांकेर
शीर्षक-छत्तीसगढ़   महतारी
विषय-छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत 
(उत्साह स्थायी भाव के साथ) 


*छत्तीसगढ़ महतारी*

छत्तीसगढ़ महतारी 
     तोर लीला अब्बड़ भारी,
घेरी भेरी शीश नवावव
     शस्य, श्यामला कोरा पियारी।

मलयाचल अस महमहाथे,
      तन-मन फहराथे तोर
 पुरवैया बड़ गुनकारी।

कौशिल्या माँ के संग 
        सबके बने महतारी,
तोर कोरा सुग्धर हे बड़ भारी।

महानदी,अऊ पैरी,सोंढूर
      तोर अंगना मां लहर-लहर लहराए,बनगे तीरथ चारों
   मुड़ा हमन बने हवन बड़ भागी।

सोनहा भुइयां 
       अब्बड़ सुग्घर,
धान कटोरा कहाये
         तै महतारी।

वीर नारायण, 
      इंदरू केवट के 
गाथा गावय इहाँ के 
          हर नर -नारी।

तोर भूइयां मा हीरा
          मोती के खान,
लोहा पथरा बनके पिधलय 
        बने हे सब बर उपकारी।

डोगरगढ़,रतनपुर, 
       दंतेवाड़ा, तोर धाम,
महानदी के कुंभ 
       नहाएं सब नर-नारी।

हीरा- मोती,लोहा,
        जंगल हवय तोर निशानी,
महल ,अटारी ,मनखे 
           बर बनगे वरदानी।

छत्तीसगढ़ महतारी 
       तोर लीला अब्बड़ भारी,
घेरी -भेरी शीश नवावन 
       शस्य,श्यामला कोरा पियारी।
______________________

व्याख्या-उपरोक्त कविता में छत्तीसगढ़ महतारी की मिट्टी, हवा,नदियाँ,तीर्थ स्थानों, स्वतन्त्रता सेनानी,खनिज एवं जंगलों की महिमा गाई है।

नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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