रचनाकार श्रीमती पदमा साहू
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
मत कर मानव तन पर अहंकार ,
एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा।
क्षिति, जल, पावक,गगन,समीरा,
पंचतत्व में यह तन मिल जाएगा।
स्वर्ग नरक इसी धरती में सब ,
जैसा कर्म करो वैसा फल मिलेगा।
जीव दया परातम पूजा करो,
महामानव बन स्वर्ग मिलेगा।
जीव बधे जो रात दिन मानव ,
राक्षस बन नर्क उसे मिलेगा।
रावण और कंस का अहंकार टूटा,
तू भी टूट कर चूर -चूर हो जाएगा।
तेरा मेरा का चक्कर छोड़,
प्रभु भजन तू कर ले वही साथ जाएगा।
अहंकार में क्यों अकड़े मानव,
खाली हाथ आया खाली हाथ जाएगा।
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