जिला:-जांजगीर चाम्पा (छत्तीसगढ़)
शीर्षक:-अहंकार
विधा:-कविता
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अहंकार
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अहंकार मनुष्य का सबसे
बड़ा शत्रू है बन जाता।
जब भी दूसरों से ईर्ष्या द्वेष हो,
इंसान उन्नति न कर पाता।।
सफलता के लिए बाधक हैं
घमण्ड ग्लानि और जलन।
इन सब चीजों से दूर रहें सदा,
बेहतर बनायें अपना जीवन।
क्रोध घृणा को न स्थान दें,
कभी भी अपनी जिंदगी में।
दूसरों के सहयोगी बनें हमेशा,
गम हो चाहे कोई ख़ुशी में।
हे मानव...इस जग में हमेशा
प्रेम स्नेह और मुस्कान बाँटें।
जब दूसरों को देंगे फूल,
कभी न मिलेंगे आपको काँटें।।
-----शैलेन्द्र धिरहे "शैल"
शंकरपाली(ड.)जांजगीर चाम्पा(छ.ग.)
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इस प्रेणनादायी कविता के माध्यम से कोई भी इंसान को अहंकार,ग्लानि,द्वेष न करने तथा सदैव जग में प्रेम स्नेह बाँटने के लिए प्रेरित किया गया है।
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