महासमुन्द, छत्तीसगढ़
सृजन-ज्ञान का प्रकाश
शीर्षक;समझ
विधा-वर्ण पिरामिड
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जो
बाँटे
ज्ञान है
आगे नित
पग धरता
घटता है चित्त
संचय जो करता।
है
पूत
एक ही
तेज सूर्य
सा तब सार
अज्ञानी अन्यायी
पाँच पूत बेकार।
तू
ग़र
मानता
बुद्धिमान
है खुद को तो
क्रोध में न तान
ख़ाक करता जान।
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