Saturday, June 20, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- विविधा

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*रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान"
*निवास-रायपुर,छत्तीसगढ़   ।
*जिला--रायपुर   ।
*शीर्षक--"विविधा "      ।
*विधा- वर्ण पिरामिड     ।
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           ==01==
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हे!
तात्
पालन
न करते
हमारा,तुम 
तो जीवनफल
आनंद,कभी न पाते ।

            ==02==
              *****
हे!
छात्र 
शिक्षण 
है,कितना 
कठिन काम 
है,ज्ञान की कला
तुमको बाँटे हम ।

           ==03==
             *****
हे!
ज्ञान 
हो पास
सँवरता 
मानव तन 
इसे बिखेरता 
समाज में,तू सदा ।

           ==04==
             *****
ये 
राह 
जीवन 
डगर की 
तप करना 
होता है,सबको 
सफलता पाने को ।

         ==05==
           *****
हे!
पानी 
कितने 
अनमोल 
देते जीवन 
सब प्राणियों को 
जब धरा में होते ।

         ==06==
          *****
हे!
वृक्ष 
कितने 
हो महान् 
देवे वो छाया 
खुद उपजाता 
फल दे फलदाता ।

        ==07===
         *******
हे!
दोस्त 
मित्रता 
निभाना है 
कठिन काम 
मन का मिलन 
हो,जब बनता काम  ।
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व्याख्या:--रचनाकार ने अपनी रचना के माध्यम से यह कहना चाहता है कि मानव जाति के जीवन के विविध रंगों से अपने जीवन को संवारने की बात को शब्दों के माध्यम से रखने की कोशिश की है ।
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मौलिक प्रस्तुति:-अरमो,रायपुर छ.ग
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