स्थान -सारंगढ़
जिला -रायगढ़
शीर्षक -बढ़े चल
विधा -कविता
-----"बढ़े चल "----
बढ़े चल जवान तू बढ़े चल
कर्तव्य पथ पर बढ़े चल
ना कही पे रुक ना थक
बढ़े चल जवान तू बढ़े चल
देश की है जरुरत तू
अपने कर्म पथ पे
बढ़े चल जवान तू बढ़े चल
माँ भारती का है लाल तू
आतंक को खात्मा कर निकल तू
बढ़े चल तू जवान बढ़े चल
देश पे है विपरीत साया
साया चिर कर निकल
जब तक ना मिले मंजिल
बढ़े चल तू जवान बढ़े चल
तिरंगे की आन है तू
मातृभूमि की शान है तू
बढ़े चल जवान तू बढ़े चल
हम भारतीय की गुमान है तू
बढ़े चल तू जवान बढ़े चल
कर्तव्य पथ पे बढ़े चल तू
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