Thursday, June 18, 2020

कोरबा से गोमती सिंह की रचना- अपने

रचनाकार का नाम-गोमती सिंह
जिला-कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा- छंद मुक्त कविता 
शीर्षक- अपनों की दरकार 
प्रस्तुत है कविता--
मंजिल हासिल करते करते भूल न जायें अपनों को, 
जिंदगी में होती है यारों 
रिश्तों की दरकार ।
कौन कहता है कि मौत के बाद दुनिया नहीं होती!!
मृत्यु के बाद ही तो होती है कारवां की दरकार ।
यही कारवां इंगित करता है;
कितनी थी हमारी दुनिया को सरोकार ।
इसीलिए यारों मंजिल हासिल करते करते भूल न जायें अपनों को ,
जिंदगी में होती है यारों रिश्तों की दरकार ।
     ।।इति ।।
ब्याख्या--रचनाकार ये कहना चाह रही है कि जिंदगी में रिश्तों का  बहुत ही  महत्वपूर्ण स्थान होता है । 
गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़ 
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1 comment:

  1. जिंदगी में और जिंदगी के बाद रिश्तों की अहमियत को दर्शाती यह रचना अत्यंत सुंदर एवं सराहनीय है

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