जिला-कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक- अपनों की दरकार
प्रस्तुत है कविता--
मंजिल हासिल करते करते भूल न जायें अपनों को,
जिंदगी में होती है यारों
रिश्तों की दरकार ।
कौन कहता है कि मौत के बाद दुनिया नहीं होती!!
मृत्यु के बाद ही तो होती है कारवां की दरकार ।
यही कारवां इंगित करता है;
कितनी थी हमारी दुनिया को सरोकार ।
इसीलिए यारों मंजिल हासिल करते करते भूल न जायें अपनों को ,
जिंदगी में होती है यारों रिश्तों की दरकार ।
।।इति ।।
ब्याख्या--रचनाकार ये कहना चाह रही है कि जिंदगी में रिश्तों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होता है ।
गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़
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जिंदगी में और जिंदगी के बाद रिश्तों की अहमियत को दर्शाती यह रचना अत्यंत सुंदर एवं सराहनीय है
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