स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग } ,
विधा--कविता ,
शीर्षक--'गलवान के शहीदों को श्रद्धांजलि' ।
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भारत के रक्षा बजट को है , हमें होगा बढ़ाना ।
चीन-पाकिस्तान को होगा , खूब सीख सीखाना ।।
सेना को सजाना पड़ेगा , मारक हथियारों से ,
कोई भी भिड़ने मत पाये , अपने रणधीरों से ।
उनके रहते नहीं सकेंगें , हमें आँखें दिखाना ।।
राजनेता जितने हमारे , आगे सदैव आयें ,
सैनिकों की है मनोबल को , कदापि नहीं गिरायें ।
उनके बलिदान के नाम से , सवाल नहीं उठाना ।।
हमारे योद्धा रणबांकुरे , देश-भक्त बलिदानी ,
हैं आन - बान - शान हमारे , वीरवर स्वाभिमानी ।
नवीनतम अस्त्र - शस्त्र से है , इन्हें होगा सजाना ।।
उपलब्ध भी कराना होगा , इनको सुविधा सारी ,
संसद में है पारित करके , राशि बढ़ायें भारी ।
मुक्त हाथों से इनके लिए , खोलें सभी खजाना ।।
संख्याबल को खूब बढ़ायें , चीन देख घबराये ,
सीमा समीप पाकी - चीनी , फटकने नहीं पाये ।
आणविकशक्ति खूब बढ़ायें , निश्चय ही सालाना ।।
गलवान नदी घाटीपर है , चीनी घुसके आये ,
बीस जवान सपूत हमारे , बलिदानकर दिखाये ।
श्रद्धांजलि दें इन वीरों को , अपना शीश झुकाना ।।
सत्तापक्ष विपक्षी सभी हैं , एकराय हो जायें ,
निज अखंडता संप्रभुता को , मिलकर चलो बचायें ।
इस शहादत का 'ठाकुर 'हमें , होगा कर्ज चुकाना ।।
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