Tuesday, June 30, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- आधा तीतर- आधा बटेर

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,जिला कांकेर
विषय-मुहावरा पर आधारित
 शीर्षक-आधा तीतर आधा बटेर

    *आधा तीतर आधा बटेर*

आधा तीतर आधा बट देखकर,
       सचमुच दुनियाँ हो गई ढेर।

कहीं  हंस का क्षीर 
       नीर कहीं कौओं का टेर,
दुनियाँ जल्दी जागे  
      कर दे ना अबेर।

गाना चाहती हूँ 
       समरसता के गीत,
द्वेष रोष को छोड़ 
         सबको मनाएं मीत।

मगर यहाँ हाल
           बड़ा बेहाल है,
उत्तर तो मिलता नहीं  
          केवल सवाल है।

खुशियाँ हो चाहे गम
           बाँटे सब हम,
इंसानियत का परचम 
          फहराएं हम।

मगर विचारों में
         यहाँ कहाँ मेल,
यहाँ तो चलता है 
      आधा तीतर आधा
 बटेर का खेल।
_______________

व्याख्या-उपर्युक्त कविता में बेमेल संयोजनों के कारण सामंजस्य  नहीं बैठा पाने का वर्णन है।

   नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर, कांकेर,(छ .ग.)

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