जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-कैसे चलेगा देश
विधा-कविता (मुक्त छंद)
विश्व व्यापी वेदना भरी,
महामारी करोना कहीं।
कहीं मलेरिया का जोर,
लाक डाउन है पुरजोर।
आधा तीतर आधा बटेर,
बताएं कैसे चलेगा देश।
कागजों पर लगते हैं पेड़,
नक्शे बांधो के बनते ढेर।
कहीं बंटते हैं माता-पिता,
कहीं जिम्मेदारी है बंटा।
आधा तीतर आधा तीतर,
ऐसा ही है हमारा परिवेश।
मानवता के पेड़ कहां हैं,
विश्व बंधुत्व की जड़ें कहां हैं
भाईचारे के फसल कहां हैं,
संस्कृति के मोती वो कहां हैं।
आधा तीतर आधा बटेर,
फिर भी प्यारा है मेरा देश।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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