जिला -बिलासपुर (छ. ग. )
विधा -छंद मुक्त (सभंग यमक प्रयोग )
शीर्षक -नशा एक अभिशाप
जीवन की गरिमा का कर गान,
आएगा नित नवा आसान विहान l
नशा न शान कोई मेरे आत्मीय हे,
नशा एक अभिशाप, स्व -अपमान ll
मानव मन का कार्य व्यापार ये,
क्षुब्ध मन हर पल होत चकित l
मन का मनका निर्माण रत नित,
कायर नशा साधक बन भ्रमित ll
मन की कमजोरी है नशा निर्बाध,
छोड़ ना इसे छोड़ना ही आधार l
साधन साध न सुमार्ग का मीत,
राह यही चुन चिरंतन, निराकार ll
नशा शराब, तम्बाकू गांजा का,
पीर ही बढ़ाते कोई पीर नही है l
परिवार समाज देश विश्व हिय को,
चीर रहा है हर पल चीर नही है ll
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