Saturday, June 27, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- ऑनलाइन पढ़ाई

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा (छ ग)
विधा कविता
शीर्षक ऑनलाइन पढ़ाई


पाठशाला सब बंद है,
फिर भी पढ़ाई का जोर है।
हमारे देश में देखो,
सब ओर ऑनलाइन पढ़ाई का शोर है।
शिक्षकों को बिना काम के,
वेतन देना भा नहीं रहा इनको।
शिक्षकों को शाला कैसे बुलाएं,
समझ आ नहीं रहा इनको।
इस कारण जबरदस्ती ऑनलाइन,
पढ़ाई का बोझ ढाल रहे हैं।
क्या ये नहीं जानते,
गावों में क्या हालत चल रहे हैं।
कई मां बाप बाहर से आकर,
क्वारेंटेन्न हुए हैं।
सरकार जो मदद कर रही,
उसी से पेट भर रहे हैं।
कहां से लाए स्मार्ट फोन,
रिचार्ज कैसे करवाएं।
उनके सामने ये नयी,
समस्या खड़ी हुई हैं।
निजी शाला की देखा देखी,
मत करो साहब।
हम गरीब बच्चों के वास्ते,
कोई सस्ता सुरक्षित राह खोजिए साहब।
उनके पीछे मत भागिये,
जो धंधा करते हैं।
शिक्षा जैसे पवित्र कर्म का, व्यापार करते हैं।
शासकीय शाला शिक्षा का मंदिर है,
मंदिर ही रहने दो।
इस वक़्त हमारे ज्ञान प्राप्ति का,
कोई सरल ,सुगम ,सुरक्षित मार्ग बतलाइए....
     सूर्य प्रकाश पाटिल

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