जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक--- भारत माता की जय
व्याख्या--कवि के द्वारा भारत माता की जय कहकर एकता विकास साथ रहने एवं चलने के लिए आह्वान किया है ।
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भारत माता की जय
भारत माता की जय बोलो ।
जय बोलो हिन्दुस्तान की ।
हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई ।
कर्म धर्म ईमान की ।
समता की सब राह चलो ।
एकता की सब बात रखो ।
विषमता तुम्हें छू न सके ।
नींव रखो नव निर्माण की ।
अपने पग से कदम बढ़ाओ ।
बाहों में ताकत भरलो ।
कैसा हो जीवन अपना ।
है जरुरत इस विधान की ।
देश की प्रगति खूब करो ।
ख़ून पसीना करके एक ।
देश से अपना है गणना ।
देखो स्वप्न यह अरमान की ।
सबको लेकर साथ चलो ।
कोई पीछे न रह जाये ।
जगाओ मन यह विवेक ।
तप चाहिए इस वरदान की ।
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