बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक - त्यागो अहंकार
विषय "- अहंकार
विधा - कविता
त्यागो अहंकार
अहंकार मत कर पगले ये जीवन है| नश्वर|
करले अच्छे कर्म जाने कब छूटे सांस की डोर||1||
छोड़ व्यर्थ मे ये इतराना, जीवन है अनमोल |
दया प्रेम से जो करो है |उसका ही मोल||2||
तू भी संसार मे करले अच्छा काम |
अंत मे तो जाना है | रे प्रभु के धाम ||3||
तेरा मेरा मे क्या लगा है |ये तो झूठी बात |
ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा ये सब उसकी सौगात ||4||
धरा का धरा मे रह जाएेगा |तू है यहाँ मेहमान |
बात समझ ले इतनी सी बनता है |क्यों अनजान||5||
अंहकार कभी छोड़ भूखो को भोजन का दे |
कर ले कुछ नेक काम अपनी पहचान बना दे ||6||
उस ईश्वर को भूल मत तू कभी सुख, दुखो मे |
अंत मे सुख पायेगा ईश के ही चरणों मे||7||
भावर्थ -अहंकार को छोड़ने की बात कही गईं है |
स्वरचित रचना
रचनाकार - सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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