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*रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान"
*निवास--बायरन बाज़ार,रायपुर ।
*जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़)
*शीर्षक:- ""गाँव का किसान ""
*विधा :--कविता (छ्न्द-मुक्त)
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==^^=गाँव का किसान ==^^=
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मैं इक ,गाँव का किसान हूँ ,
जोतता हूँ,खेत में हल और बक्खर,
मन को बहलाने गाता हूँ,
करमा,ददरिया और पंडवानी,
करता हूँ बातें,हल में जुते बैलों से,
तो कभी मन ही मन करता हूँ,
धरती माता से बातें ।
आज मैंने,इतना जोत लिया,
कल इससे भी कुछ ज्यादा ,
हल की मुठिया को,
जोर लगाते,बड़ी मजबूती से दबाता ,
यूँही बैलों को छड़ी से चमकाता ,
अपनी उम्मीदों को अंजाम दिलाता,
धीरे-धीरे आगे बढ़ते ही जाता ।
पर,अफ़सोस है कि,
जिस पशुधन से अपना जीवन चलाता
उसे वह सिर्फ,पशु समझ हांकता,
काम लेने के बाद भी,
उसे,उसके हाल पर छोड़ देता ।
क्या गाँव का किसान,इतना निर्दयी या
भोला-भाला होता ,
जो अपना जीवन दाँव पर लगाता,
उसको बेज़ुबान समझकर,
अपनी लाठी से हाँकता रहता,
पर कभी ,ढंग से भी नहीं दुलराता ।
गाँवों में देखो यारों,
वे पशुधन की,न करते ढंग से सेवा,
लावारिश से घुमते-फिरते,गाँवों में,
और अक्सर दिखते,मरियल पशु यारों।
इसलिए मैं सभी किसानों से कहता हूँ,
उनको दिल से दुलार करोगे,
समय रहते,उनके कष्टों का उपचार करोगे,
तो वे आपका सपना और
आपके भविष्य को भी सुरक्षित रखेंगे।
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**व्याख्या:--रचनाकार अपनी रचना के माध्यम से गांव के किसानों द्वारा पशुधन का उपयोग कृषि कार्यों के लिए करतें तो है ।किंतु उनका सही देखभाल नहीं करते हैं ।इसी व्यथा को प्रस्तुत किया है ।
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