पता - पेंडरवानी ,बालोद ,छ. ग.
विधा - मुक्त छंद
शीर्षक - इश्क़ का चांद
इश्क़ का चांद
-------------------------------------
जब औरों से अलग ,
किसी के लिए एहसास हो जाए ,
रोज मिलकर भी ,
उसका मिलना खास हो जाए ,
दिल मे आहट उसकी ,
होंठो पे मुस्कुराहट जब लाए ,
वो इश्क़ का चांद है जिसे दुआ में ,
कहे कि मेरे पास हो जाए ,
न होने से बेचैनी हो ,
उसके होने से राहत हो ,
उसके हँसने में हँसी अपनी ,
उसके रोने से आहत हो ,
वो धड़कन में उतर जाए ,
इश्क़ का चांद बन जाए ,
उसकी नजरों में मेरी प्यास ,
मेरी रगों में उसकी चाहत हो ,
वो धड़कन मेरी हो ,
मैं उसकी धड़कन बन जाऊं ,
वो पल पल साथ हो मेरे ,
ऐसे उसको याद मैं आऊं ,
देखा करूँ हरपल ,
दिन में रात ख्वाबों में ,
वो सोहनी हीर बन जाए ,
मैं इश्क़ का चांद बन जाऊं ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
No comments:
Post a Comment