जिला-कांकेर,छग
विषय-पहली फूंहार
विधा-मुक्त छंद
बारिश की पहली
फूंहार पड़ते ही
खिल उठी हैं
नन्हीं कलियां।
तितलियों का
दल निकल
पड़ा है मकरंद
की चाह में।
हवा के झोंको
से झूम उठे हैं
तरुवर मिट्टी की
सोंधी महक से।
तपिश मुंह छुपा
जाने किधर जा
रहा है छतरी
की तलाश में।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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