रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनाँदगांव (छ.ग.)
शीर्षक -- किसान
विधा -- दोहा छंद
अलंकार -- यमक अलंकार
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।।1।।
सोना उपजे खेत में ,
करम करे हलवाह ।
सोना खोना है पता ,
काल करे परवाह।।
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।।2।।
हलधर हल से हल करे ,
उदर अग्नि का अंत ।
भूखा रहकर है हरे ,
करम करे ज्यौं संत ।।
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।।3।।
कर से कर को जोड़ते ,
करते खेतों में काम ।
साथ कभी ना छोड़ते ,
सुबह कहो या शाम ।।
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।।4।।
काल करे कर जोड़ते ,
देव करे अति मान ।
काल कभी ना छोड़ते ,
काल नहीं निज जान ।।
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सोना = धन , सोना = शयन करना ।
हल = हल ,
हल = किसी समस्या का समाधान ।
काल = शिव देव , काल = समय ।
काल = मृत्यु , अंत ।
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व्याख्या :---
प्रस्तुत दोहा के माध्यम से हमनें
कृषक की माली हालत और उनके कार्यों का
चित्रण संक्षेप में यमक अलंकार का प्रयोग करते
हुए किया है ।
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Bahut sunder rachna sir
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