जिला रायगढ़
विधा कविता
शीर्षक आगे किसान बरसात
आगे की किसान बरसात
करिया करिया बादर कुदरत है,
सूर सूर, सूर सूर बैहर धुकत है,
चारों मुड़ा हो गय अंधियार,
नागार जुडा के चेत करो जी,
आगे किसान बरसात।
करिया करिया......
अर ततता बियासी के नागर,
धन्य है किसान तोरेच जांगर,
खांद मे बोहे बियासी के नागर,
हाथ में धरे तुतारी जी,
पीछु में कमिहा बोपरा मन,
धरे हैं गैती कुदारी जी।
करिया करिया..........
नागर फंडाए बुडगा बैला,
रेगत हे खलभल्ल चिखला,
डेरी हाथ मे तुतारी धरेहे,
धरेहे नागर के मुठीया,
मूड में बंडी पागा पहने,
चुचुहावत हे मुड ले पसीना,
माडी ले धोती पहने,
बेरा के न ई ये सुरता।
करिया करिया..........
कोन डहर मैना बोले,
कोन डहर बोले पडकी,
चिरई चिरगुन के बोली म,
खेत खार लागे गझिन,
करिया करिया.......
..........................................
व्याख्या- छत्तीसगढ़ी कविता में कवित्री बरसात और किसानी के बीच कार्य कल आपका वर्णन की है बरसात में किसान अपना खेतीकिसानी शुरू करता है और अपने नौकरों के साथ किस तरह से खेत पर कार्य करता है इसी के संदर्भ में इस कविता में दर्शाया गया है।
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