स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- गीत
शीर्षक -"जय जगन्नाथ"
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1.
जय जगन्नाथ हैं नाथ हमारे
दे स्वप्न नरेश इंद्रद्युम्न को कृष्ण हरे
दारू काठ मिला सप्त सागर तीरे
विश्वकर्मा लिए आये वृद्ध रूप धरे
बंद कमरे में कई दिन काठ सवारे
जय जगन्नाथ हैं ........
2.
पर राजा की अधीरता के मारे
अधूरी मूर्ति आज मन्दिर में विराजे
ये कहानी नहीं , हक़ीक़त है
कलियुग के यही भगवान हैं प्यारे
जय जगन्नाथ हैं ............
3.
जगत पति जय- जय जगन्नाथ
कालिया कान्हु खाते अभड़ा भात
रथ में विराजे भ्राता भगिनी के साथ
सुभद्रा है बहन तो बलभद्र हैं भ्रात
जय जगन्नाथ हैं ...............
4.
रथ में सवार आते जग के स्वामी
ना खींच सकें खल और कामी
प्रभु दर्शन को हर जीवन तरसे
आओ खींचे रथ पूरी श्रधा मन से
जय जगन्नाथ हैं ...........
5.
प्रभु की महिमा कौन न जाने
आते हैं भक्त ,दर्शन को तुम्हारे
मनोकामना पूरी करते हैं सारे
पुष्पा है अब प्रभु थारे सहारे
जय जगन्नाथ हैं ..............
Jai Jagannath Bhagwan Ke
ReplyDeleteBahut He Sundar Kavita Hai Didi