Saturday, June 6, 2020

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन" की रचना- किसान

नाम:- कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन"
ब्लॉक:- प्रेमनगर, जिला:- सूरजपुर, छत्तीसगढ़
अलंकार:- यमक
विधा:- कविता
विषय:- किसान का महत्व
शीर्षक:- किसान होने पर अभिमान।
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चहुँ ओर अब चंचल हो उठे,
प्रकृति का निराली है छटा।
उमड़ घुमड़कर घटा आये,
बरसे पानी अम्बर से मेघ घटा।
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सुबह होते सब मिलजुलकर,
खेतों का करते हैं ध्यान।
मिट्टी की बंजरता हल करने,
हल लेकर निकल जाते किसान।
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खेतों की दिन रात सेवा कर,
बढ़ाता है इसका अभिमान।
कभी न थकते ऐसे सुत है,
सेवक रूप लिए चलते सीना तान।
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गगन भूमि को तृप्त करने,
नयन से अश्रु सदृश्य जल बरसाये।
खेतों में फसल भी बढ़ आये,
देखकर किसानों के हृदय हरषाये।
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प्रकृति सेवक जग का जीवन है किसान,
तन तोड़ पसीना बहाकर अन्न उगाता,
इनके खेतों की लहलहाती फसल,
संसार का भाग्य जगाता।
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नाम:- कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन"
ब्लॉक:- प्रेमनगर, जिला:- सूरजपुर, छत्तीसगढ़

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