स्थान-लैलूंगा ,जिला- रायगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक-स्त्री
स्त्री
एक अच्छी-भली स्त्री का
कैकयी बन जाना
अपने आसपास की मंथरा ओं
को ना पहचान पाना
इससे बुरी और क्या हो सकती है
अपने अहंकार के लिए
अपने ही घर में आग लगा लेना
स्त्री जो इस सृष्टि की रचनाकार हैं
माँ है ममत्व की पहचान है
एक परिवार की आधारशिला है
अपना अस्तित्व भूल बहकावे
में आ जाना
इससे बुरी और.................
इक स्त्री की सबसे बड़ी दुविधा
हर दूसरी स्त्री को अपना प्रतिद्वंद्वी मान लेना
मन मे कड़वाहट भर लेना ,
उच्च चरित्र स्थापित करने की
जगह त्रिया चरित्र दिखाना
इससे बुरी और...................
इक स्त्री जो सीता बन सकती थी
उसका कैकयी बन जाना...........
और अपने ही घर मे आग लगा लेना
इससे बुरी और............
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