Monday, June 1, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- घर

कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-घर स्वर्ग लगने लगा है।
विधा-मुक्त छंद (अतिशयोक्ति अलंकार)बाल -केन्द्रित

मम्मी स्कूल नहीं जाना पड़ता,
होमवर्क नहीं करना पड़ता।
आया के डांट से भी मुक्ति,
वाह करोना मस्त तेरी युक्ति।

मम्मी का हर पल  ममत्व दुलार
पापा का भी मिलता पूरा प्यार।
न परीक्षा की तैयारी न  पढ़ाई 
करते रहो दिन भर घर में लड़ाई।

वाह करोना वाह टीवी देखना फ्री
नये -नये कार्टून पढ़ाई की इतिश्री
जनरल प्रमोशन भी तुने दिलवाई
पकवान खाकर मोटे हो गए भाई।

तरह -तरह के खेल  और व्यायाम
घर बैठे खाओ मिश्री से मीठे आम
खूब तरबूज खाओ पानी  बचाओ
आराम करो करोना के गुण गाओ

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग

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