स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--कविता
शीर्षक--'गौ वंश का संवर्द्धन करें'
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गौ माता से रहते आया , सारे जग का नाता ।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।
गौ सेवा करनेवालों का , भाग्य भी सँवर जाता ,
वह परिवार धनधान्यवाला , निश्चय ही बन जाता ।
आनंद और सुविधाओं का , मानो पावस आता ।।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।१
गौ दुग्ध अमृत जैसे होता , हृष्ट - पुष्ट - बलकारी ,
स्वर्ण तत्व इसमें होता है , रहा है रोगहारी ।
दुग्ध उत्पाद सारी वस्तुएँ , हैं आरोग्य प्रदाता ।।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।२
गौ मूत्र भी हुआ करता है , रोग मिटानेवाला ,
असाध्य रोगों से बच जाये , नित - नित पीनेवाला ।
भावी जीवन को है अपना , खुशी-खुशी जी पाता ।।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।३
गौ से है गोबर मिले हमें , रहा यह अन्नदाता ,
जैविक खाद खेत में डाले , उपज बहुत बढ़ जाता ।
उर्वरा शक्ति खेतों की है , यह खाद नित बढ़ाता ।।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।४
गौ से हमको बछड़े मिलते , कृषक मित्र ये होते ,
भार ढोते रहे ये गाड़ी में , खेतों में हल जोते ।
बछिया भी उनसे ही पाते , पशुधन भाग्यविधाता ।।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।५
गौ वंश के है महत्व को , मशीनों ने घटाया ,
दर-दर भटकें पशुधन सारे , जब से विज्ञान आया ।
संवर्द्धित इन्हें 'ठाकुर' करें , कहतीं भारतमाता ।।
समस्त सुख को देनेवाली , करुणामय गौ माता ।।६
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व्याख्या--गौ वंश का महत्व , उससे मिलनेवाले लाभ
संवर्द्धनपर प्रकाश डालने का प्रयास ।
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