Saturday, June 27, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- गौ वंश

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--कविता
शीर्षक--'गौ वंश का संवर्द्धन करें'                 
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गौ  माता  से   रहते  आया , सारे  जग  का   नाता ।
समस्त  सुख को  देनेवाली , करुणामय  गौ  माता ।।
गौ   सेवा   करनेवालों  का , भाग्य भी सँवर जाता ,
वह परिवार धनधान्यवाला , निश्चय  ही  बन जाता ।
आनंद और सुविधाओं का , मानो   पावस   आता ।।
समस्त  सुख को देनेवाली , करुणामय  गौ   माता ।।१
गौ दुग्ध अमृत  जैसे  होता , हृष्ट  -  पुष्ट - बलकारी ,
स्वर्ण  तत्व  इसमें  होता है , रहा     है      रोगहारी ।
दुग्ध  उत्पाद  सारी  वस्तुएँ , हैं   आरोग्य    प्रदाता ।।
समस्त  सुख को देनेवाली , करुणामय  गौ   माता ।।२
गौ मूत्र भी  हुआ  करता है , रोग        मिटानेवाला ,
असाध्य रोगों से बच जाये , नित - नित  पीनेवाला ।
भावी जीवन को है अपना , खुशी-खुशी  जी पाता ।।
समस्त  सुख को देनेवाली , करुणामय  गौ   माता ।।३
गौ से  है  गोबर  मिले  हमें , रहा    यह   अन्नदाता ,
जैविक खाद खेत में डाले , उपज बहुत  बढ़ जाता ।
उर्वरा  शक्ति  खेतों की  है , यह खाद  नित बढ़ाता ।।
समस्त  सुख को देनेवाली , करुणामय   गौ   माता ।।४
गौ से हमको बछड़े मिलते , कृषक   मित्र  ये  होते ,
भार ढोते  रहे  ये  गाड़ी में , खेतों   में   हल   जोते ।
बछिया भी उनसे  ही पाते , पशुधन   भाग्यविधाता ।।
समस्त  सुख को देनेवाली , करुणामय   गौ   माता ।।५
गौ  वंश  के  है  महत्व को , मशीनों    ने     घटाया ,
दर-दर भटकें पशुधन सारे , जब  से  विज्ञान आया ।
संवर्द्धित  इन्हें 'ठाकुर' करें , कहतीं       भारतमाता ।।
समस्त  सुख को देनेवाली , करुणामय   गौ   माता ।।६
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व्याख्या--गौ वंश का महत्व , उससे मिलनेवाले लाभ
              संवर्द्धनपर प्रकाश डालने का प्रयास ।

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