जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
रचना का शीर्षक - " विवाह- एक पवित्र रिश्ता "
विधा- " छंदमुक्त कविता "
व्याख्या- प्रस्तुत पंक्तियों में एक पत्नि शादी जैसे पवित्र बंधन में बंधने के बाद सदैव उनका साथ देने की बात कहते हुए ,अपने पति से क्या वादा चाहती है उसका वर्णन किया गया है।
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बाबुल की परी थी मैं,
अब अर्धांगिनी तुम्हारी हो गई हूं।
साथ जीने की कसम खाई है हमने,
साथ चलने को राजी हो गई हूं।।
आपसे ही शुरू मेरी दुनिया,
गुजारा आपके राशन से होगा।
डोली जा रही साथ आपके,
अंतिम विदाई आपके आँगन से होगा।।
साथ चलना हमेशा मेरे,
ना बदलना तुम मौसम की तरह।
ख्याल रहूंगी मैं भी आपका,
हो न जाना आप कभी बेपरवाह।।
सदा बनना हमदर्द मेरे,
सम्मान मेरी ना जाने देना।
विश्वास रखना हमेशा मुझ पर,
गलतफहमियों का नकाब न आने देना।।
रूठ जाऊं कभी मैं आपसे तो,
प्यार से मुझे मना लेना।
रब से मांगा है मैंने तुमको,
रब तुम हो मेरे,
ये रब को भी बतला देना।।
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रचनाकार - संतराम कुम्हार
Bhut sundar👌👌
ReplyDeleteBahut achcha कविता h sir
ReplyDeleteBahut badiya bhai
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteNice sir ji
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteVery Nice �� bahut khub..��
ReplyDeleteWahh.... Bahut badhiya Mama ji
ReplyDeleteBahut badiya bhai
ReplyDeleteBahut Sunder varnan hai sir g
ReplyDeleteBahut badiya h Sir
ReplyDeleteBehtrain ji
ReplyDeleteबहुत खूब
ReplyDeleteबहूत खूब
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteअति सुंदर wah very nice
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