Monday, June 15, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- बालमन

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"बालमन"
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          "बालमन"
बालमन मानो हठी होत है
जानो जैसा पवन वेग है 
              माता चन्द्र को मामा बताये
              मामा चन्द्र ईव हरसि उर लाये
घोड़ा काठ में बैठ बाल मग्न
दौड़त मानो अश्व है संग
               छम-छम बाजे पैर पैझनिया
               मानो बरखा बूंदें पड़े हे भुईंया 
ज्यों बालक तन तने
मानो सूर्य का तेज मने
               पुष्प मानो इनके कोमलांग 
               निश्चय ही पुष्पा रखे इसकी मांग
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(इस रचना में कई बार उपमेय की तुलना उपमान से की गई है 1 बाल हठ को पवन वेग से
2चन्द्र को मामा से
3काठ घोड़ा को असली घोड़ा से
4छमछम पैजनिया ध्वनि को वर्षा की बूदों की ध्वनि से
5 बढ़ते उम्र के साथ घटते हठी पन को घटते सूर्य के तेज से
6बाल अंग को पुष्प से)

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