जिला-कांकेर
विषय-अतिश्योक्ति पूर्ण
वीर रस
शीर्षक-राणा
राणा
राणा तेरी वीरता की अमर कहानी,
हवा संग बातें करती
बलखाती जवानी।
राणा का चेतक हूँकार भरता,
समर में अरिदल के बीच बेखौफ टूट पड़ता।
पैरों से रौंद-रौंद कर हवा से बातें करता,
चम-चम, चमकती तलवार ज्वाला सी झलकती,
चतुरंगिणी सेना पर सौदामिनी सी गिरती।
क्भी इधर,कभी उधर प्रलय शिखा बन बरसती,
समर क्षेत्र में रणचंडी सी मचलती।
लहराती, बलखाती दुश्मनों के ,
सर काट-काट अपनी गाथा कहती।
राणा की वीरता की अमर कहानी,
हवा संग बातें करती बलखाती जवानी।
व्याख्या-उपरोक्त कविता में राणा प्रताप की अदम्य वीरता, राणा का चेतक और उसकी तलवार की वीरता का अद्भुत बखान करती है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ .ग.)
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