लेख- राजनांदगांव की ऐतिहासिक धरोहर खैरागढ़ इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय और डोंगरगढ़ की पहाड़ा वाली मां बमलेश्वरी।
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
1. परिचय और इतिहास....
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय राजनांदगांव जिले से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में है ।जो कि खैरागढ़ ब्लॉक में स्थित है। इसकी स्थापना राजा वीरेंद्र सिंह और रानी पद्मावती जो 24 वे रियासत के राजा थे, अपनी बेटी इंदिरा जो बहुत ही कम उम्र में स्वर्ग सिधार गई जिससे रानी की *गोद सूनी हो गई* ।इन्दिरा को संगीत से बहुत लगाव था उनकी याद में यह इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की स्थापना 14 अक्टूबर 1956 को विधिवत रूप से की गई। कहा जाता है इसके पूर्व यह दो कमरों में कक्षा लगती थी राजा ने अपनी जमीन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय बनाने के लिए दान में दे दिया।खैरागढ़ इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय पूरे एशिया में एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां पर थाईलैंड,अफगानिस्तान ,श्रीलंका और देश विदेश के लोग शिक्षार्थी, शोधार्थी के रूप में आकर यहां शिक्षा ग्रहण करते हैं।
*शिक्षा.* . यहां हिंदुस्तानी गायन वादन कर्नाटका गायन वादन मूर्तिकला चित्रकला म्यूजिकोलॉजी और कत्थक नृत्य, भरतनाट्यम ,लोकगीत ,लोक नृत्य संकाय हैं जहां बच्चे अलग-अलग विभागों में अपनी कला में गुरुजनों के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करते हैं ।यहां हर विभाग की एक अपनी अद्भुत महत्व है जिसमें अलग-अलग विभागों में विद्यार्थी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। खैरागढ़ इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में प्रति वर्ष खैरागढ़ महोत्सव होता है इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा कला का प्रदर्शन होता है, जो लोगों को **मंत्रमुग्ध कर देती है* ।यहां संगीत विश्वविद्यालय के बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर झांकी में भी अपना प्रदर्शन करते हैं और अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं जिससे यह कहा जा सकता है कि *हाथ कंगन को आरसी क्या* एशिया का एकमात्र संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के लिए लागू होता है। यहां संग्रहालय में बच्चों द्वारा बनाए गए विभिन्न प्रकार की मूर्तियां और पुरातत्व विभाग द्वारा मिले हुए मूर्तियों का संग्रहण है जो प्राचीन काल का है।यहां पीएचडी और डि लीट की शिक्षा व्यवस्था है ।खैरागढ़ यूनिवर्सिटी का उत्तरोत्तर विकास हो रहा है। यहां विद्वत जन बच्चों को अपने शिक्षा से सराबोर कर रहे हैं और बच्चे अपनी संस्कृति, परंपरा,चित्रकला, लोकगीत, गायन, नाटय सभी तरह की शिक्षाओं में प्रवीण हो रहे हैं। यह खैरागढ़ इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की प्रसिद्धि है। जो प्राचीन धरोहर को समेटे हुए हैं। वर्तमान में यहां के राजा जो अभी विधायक हैं देवव्रत सिंह हैं।
2. **पहाड़ा वाली मां बमलेश्वरी
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पहाड़ा वाली मां बम्लेश्वरी राजनांदगांव से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पूर्व दिशा में है। मां बमलेश्वरी की मंदिर लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ पर स्थित है और छोटी माता बमलेश्वरी नीचे स्थित है । बमलेश्वरी मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि प्राचीन काल में मंदिर को कामाख्या मंदिर कहा जाता था।यहां पर एक काम कंदला नाम की नर्तकी रहती थी जिनका प्रेम प्रसंग माधवन से था जो कि एक संगीत विशारद था। माधवन की मृत्यु की खबर सुनकर कामकनदला पहाड़ पर नीचे स्थित तालाब में अपना प्राण उत्सर्ग कर दी इस कारण इस तालाब का नाम काम कांदला पड़ा। इस मंदिर की स्थापना के संबंध में कहा जाता है कि यह राजा वीर सिंह जिसकी कोई संतान नहीं था, संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव और पार्वती की पूजा अर्चना की है और उसी के फल स्वरूप मंदिर की स्थापना पहाड़ पर करवाया गया जिससे उनको एक पुत्र वीरसेन संतान के रूप में मिला। यहां पर प्रतिवर्ष दो बार चैत नवरात्र और क्वार के महीने में मेला लगता है यहां मेला लगने से आसपास के लोगों के *दिन फिर जाते हैं*। ऊपर पहाड़ पर स्थित मंदिर जहां से नीचे खेत, खलिहान, जलाशय ब तालाब ऊंची ऊंची पहाड़,हरे भरे मनोरम दृश्य,अद्भुत सौंदर्य *मन मोह लेती है।* यहां श्रद्धालु भक्तगण अपनी आस्था विश्वास लिए हुए इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर आते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की आस्था के साथ देवी मां का दर्शन करते हैं। ऐतिहासिक मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है जो प्राचीन काल की धरोहर है। जिसका समय-समय पर जिर्णो- उद्धार भी होता रहा है ।अभी वर्तमान में छोटी मां बम्लेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ जो अद्भुत कलाकृतियों का चित्रांकन से भरा हुआ है।
इस तरह हमारे राजनांदगांव जिले की खैरागढ़ रियासत की इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय और डोंगरगढ़ स्थित पहाड़ा वाली मां बम्लेश्वरी का प्राचीन ऐतिहासिक दर्शन को हमने जाना।
श्रीमती पदमा साहू
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
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