Saturday, June 13, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरबा से गोमती सिंह की रचना- पिंजरें

रचनाकार का नाम-गोमती सिंह 
जिला-कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा-कविता ,छंद मुक्त 
शीर्षक-पिंजरे की शेरनी 
प्रस्तुत है कविता--


शेरनी हूँ मैं पिंजरे की।
नायिका हूँ मैं ग्रंथों की।
कर्ज दार हूँ मैं ईश्वर की ।
इसलिए मजदूरन हूँ मैं संसार की ।
अजीब विडंबना है मेरी हैशियत का, 
छूट रही हूँ कर्ज यहाँ पर, 
फिर भी लक्ष्मी हूँ तिजोरी की ।
अपनी हैशियत का अंदाजा मैं ही जानूँ, 
पर क्या करूँ ;
शेरनी हूँ मैं पिंजरे की।
      ।।इति ।।
ब्याख्या--प्रस्तुत कविता में रचनाकार एक नारी की विवशता का वर्णन कर रही है किस तरह नारी शक्तिशाली होते हुए भी बंदिशों के घेरे में रहती है ।
      गोमती सिंह 
कोरबा छत्तीसगढ़ 
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3 comments:

  1. शेरनी जो पिंजरे के रहती है वह और् खूंखार होती है। जब वह आजाद होती है तो उसके ताकत कक अंदाजा नही होता।बेहद सूंदर रचना।

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  2. शेरनी पिंजरे में रहे या आजाद उसका मान कहीं कम नहीं हो सकता, बंदिशों के घेरे में भी वह अपना मान कम होने नहीं देती। बहुत सुंदर रचना 👌

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