जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक--- गरीब का जीवन
व्याख्या--कवि के द्वारा गरीबी का जीवन उससे उत्पन्न दशाओं का वर्णन एवं उसके समाप्त होने पर तपस्या यज्ञ हवन ईश्वर भजन की बात कही गई है ।
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गरीब का जीवन
गरीब -गरीब तेरा जीवन ।
देख तेरी दशा जलता ए मन ।
वश चले तेरी दशा सुधार दूं ।
मिल जाए तुझे घर ,अन्न, वसन ।
गीले -गीले तेरे घर ।
पल- पल जीना तेरा दूभर ।
छोटे -छोटे बच्चे तेरे,
श्रम -श्रम टूटता कमर ।
शिक्षा -शिक्षा के लिए रोता
तेरे स्वप्न का कैसे हो सृजन ।
ठीक- ठीक वर्तमान नहीं ।
भविष्य -भविष्य क्या होगा ।
एक -एक बात सोचता हूं ।
इक- इक दृश्य क्या होगा ।
तप -तप करता तेरे लिए ।
खोज लेता होता तपोवन ।
स्वप्न- स्वप्न तेरे बिखरे ।
देखूं स्वप्न किसी का निखरे ।
और भले हंसते होंगे ।
मुझको यह खूब अखरे ।
तेरी दशा सूधरे करुं ।
यज्ञ ,दान, हवन, ईश्वर भजन ।
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