Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- प्रेम

रचनाकार- नलिनी बाजपेयी
    जिला-कांकेर
    शीर्षक-प्रेम
  

~* •° *प्रेम* °•* ~
°°°°°°°°°°°°°°°°°
धवल रजतधार सा, 
   प्रेम की  सुरभित 
         बयार देखो,
कभी उफनती, 
        कभी सिसकती,
             प्रेम की रसधार देखो।

रात-दिन की दीवानगी  
   करती इंतजार देखो,
      कभी गुजरती बड़ी 
            बेकरार देखो।

रातें सन्दल सी महकी,
    साँसे है ज्वाला 
        सी दहकी ,  
           विरहन की 
                तड़पन देखो।


वो बातें,
     वो खूबसूरत 
           नजारे देखो,
   वो जलती अगन, 
          वो बहकी-बहकी 
                  बातें देखो।

प्रेम मेरा चकोर सा,
    शलभ का दीपक 
        सा प्यार देखो,
परवाना बना हूँ,
    वो समर्पण का
        पुनीत भाव देखो।

नीरव नभ का कोना,
    रजनी में अलकों का 
         समाना देखो,
फूलों में सौरभ होना,
      तुम्हारे हिय में 
            मेरा खोना देखो।

प्रेम लोक का पावन प्यार ,
     बना  गलहार देखो,
         युगों-युगों रहूँ सुहागन,
             सुखमय रहे घर-द्वार देखो।

धवल रजतधार सा 
    प्रेम की सुरभित
         बयार देखो,
कभी उफनती
    कभी सिसकती
         प्रेम की रसधार देखो।
व्याख्या-उपरोक्त कविता प्रेम की उदात्त रूप जो शुभ्र चाँदी की चमकती धार तथा सुरभित बयार के समान है।सन्दल के समान है।प्रेम चकोर तथा शलभ का दीपक के समान है।
......................

    नलिनी बाजपेयी

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...