जिला -कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक-" लता"
ऐ लता! तू सुन्दर सुनहरे फूलों वाली
क्या लिख्खूँ मैं तुम पर
कविता या कव्वाली ।
छा जाती है जब तू
हरे वृक्षों पर ,तब कहलाती है अमरबेल
चूसने वाली,
छा जाती है जब सूखी काली बबूल की डाली पर,
तब कहलाती है लता फल देनें वाली ।
हरे वृक्षों की तुम चाहत मत रखना
जिसनें नाम रखा तेरा अमरबेल चूसने वाली
उसी सूखी काली बबूल की डाली की चाहत रखना,
उसी पर गाना गीत ,कव्वाली ।
।।इति ।।
गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
ब्याख्या-रचनाकार ने नारी को लता की संज्ञा देते हुए कह रही है कि नारी हरे वृक्ष (पुरूष) पर आश्रित होती है तब उसे अमरबेल कहा जाता है और जब पुरूष नारी आधारित होते हैं तब उसे लता फल देने वाली कहा जाता है ।
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गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
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