स्थान:- डोलेसरा, तमनार
जिला:- रायगढ़ ,छत्तीसगढ़
विधा:- छंदमुक्त कविता
शीर्षक:- चुनौती
चुनौती
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हर दिन की शुरुआत करेंगे, भारत मां को याद करेंगे। घर-घर लहरा कर तिरंगा, जय हिंद जिंदाबाद करेंगे।
देश को सदा आबाद करेंगे, रक्षा के लिए फरियाद करेंगे।
देश के दुश्मन टिक न सकेंगे,
ऐसे उन्हें बर्बाद करेंगे।।
हर सपने साकार करेंगे, मातृभूमि से प्यार करेंगे।
दुश्मन को दाग कर गोली, चुनौती हर स्वीकार करेंगे।।
हर शस्त्र को बेकार करेंगे,
आक्रांताओ का प्रतिकार करेंगे ।
संगीन भोंककर सीने में,
अर्थी सबकी तैयार करेंगे।
गद्दारों को दूर करेंगे,
घुटने टेकने पर मजबूर करेंगे।
घसीट कर उन्हें बीच चौराहे, मार कर चूर चूर करेंगे।।
भारत को सजाकर हूर करेंगे,
उसके लिए हर कुसूर करेंगे। हर कर दुश्मन की पगड़ी,घाव देकर नासूर करेंगे।
हर सीमा पर राज करेंगे,क्रांति का ऐसा आगाज करेंगे।
अपने सीमा में रहना,
वरना दो गज को मोहताज करेंगे ।
बुलंद अपनी आवाज करेंगे, हर वीर पर नाच करेंगे।
लहराकर तिरंगा आसमान में,
अपने हौसले का परवाज करेंगे।।
अब नहीं हम भूल करेंगे,
हर कर्ज वसूल करेंगे।
झुकाकर कायनात सारी,
अपने चरणों का धूल करेंगे।।
मौलिक रचना
अजय पटनायक
यमक अलंकार- सीमा- अंतिम छोर, औकात
हर- छीनना,प्रत्येक
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