बैकुंठपुर,जिला_ कोरिया छत्तीसगढ़।
विधा_सायली
शीर्षक_मां
मैं
भी तो
मां ही हूं
फिर क्यूं
अपमान।
पुत्र
तुम मेरे
लेकिन क्यूं हो
बताओ, मुझसे
अनजान।
दुनिया
कहती है
मां होती महान
बस होती
गुणगान।
आज
मां अकेली
ही सम्हाली है
घर की
कमान।
घंटी
भी नहीं
बजती अब तो
फोन की,
सुनसान।
एक
झलक का
रहता है इंतजार
आ जाए
संतान।
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
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