स्थान- बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- सायली
शीर्षक - "मां"
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मां
तुम कहां
चली गई हो
तुम्हें कहां
ढूंढूं
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तुम्हे
ना देखूं
दिल घबराता है
पता किससे
पूछूं
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तुम
जो नहीं
तो कुछ नहीं
मैं भी
नहीं
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तुम
कहां हो
मैं आती हूं
तेरे पास
वहीं
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मेरी
आंखों से
बहते अस्रू धारा
रोके ना
रूके
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ये
मां बेटी
का रिश्ता है
तोड़े कैसे
टूटे
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तेरा
डांटना मारना
सब याद है
तेरा प्यार
भी
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मेरे
बालों को
चोटी बना गुथना
तेल लगाना
भी
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तेरा
आंचल में
छुपा कर बचाना
पिता जी
से
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और
बाद में
चुपके से बताना
इशारों इशारों
से
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ऐसा
क्या हुआ
तेरा मेरा साथ
क्यूं छूटा
हाथ
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आज
तेरे बिना
मैं अकेली हूं
कोई नहीं
पास
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सब
कहते हैं
जिसकी मां नही
उसका गावं
नहीं
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फिर
भी तू
मुझे छोड़ गई
तेरा पता
नहीं|
दिल को छू लेने वाली मार्मिक रचना अतिसुन्दर।
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