स्थान-बनाई रायगढ़
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक -"घोंसला"
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घोंसला
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घोंसला बनाने में मेहनत बड़ी
इसे बनाने चिड़िया दूर दूर उड़ी
तिनका तिनका जोड़े हैं उसने
तब जाकर घोंसला बनी
घोंसला सबको प्यारा है
चाहे छोटा या बड़ा हो
सर पे छत होना सहारा है
चाहे महल हो या झोपड़ी
घोंसला बनाने में मेहनत बड़ी
ईंट- ईंट रख दीवार जुड़ी
दीवारों से कमरे, और कमरों में छत पड़ी
बरसों लगे बनाने में इसको
तब हुई परिवार की बसेरा खड़ी
घोंसला बनाने में मेहनत बड़ी
आंधी आये तूफां आये
जोर-जोर पेड़ों की टहनी हिलाये
पर विश्वास का तिनका न डगमगाये
देख चिड़िया को बच्चों की चिंता पड़ी
घोंसला बनाने में मेहनत बड़ी
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