Thursday, June 11, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले अजय पटनायक की रचना- नैतिक पतन एक चिंतन

रचनाकार:- अजय पटनायक
जिला:- रायगढ़,छत्तीसगढ़
विधा:- छंद मुक्त कविता
शिर्षक:- नैतिक पतन एक चिंतन

*नैतिक पतन- एक चिंतन*
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बढ़ रहा अत्याचार देखो,
पतन होता संस्कार देखो ।
नैतिक मूल्य धूमिल हो चुकी,
रो रहा सदाचार देखो।।

झूठ का व्यापार देखो,
ओछे होते विचार देखो।
अपंग हो गई ईमानदारी,
दुष्टता का संसार देखो।।

टांग खींचता यार देखो,
स्वार्थ में लिप्त प्यार देखो ।भीख मांगते भाईचारा,
विश्वास पर चलता हथियार देखो।।

बिखरता परिवार देखो,
रिस्तो में तकरार देखो।
त्रिया चरित्र फूल रही,
संबंध होता लाचार देखो।।

सत्कर्म बीमार देखो,
बढ़ता व्यभिचार देखो।
बेइज्जत होते बुजुर्ग,
खत्म होता सत्कार देखो ।।

होता ज्ञान बेकार देखो,
गुरुजन से दुर्व्यवहार देखो।
बिकने लगी है विद्या,
स्कूल होता बाजार देखो।।

प्रजा बनता ठेकेदार देखो,
राजा खरीदार देखो।
राजशाही गर्त में पड़ी,
कठपुतली होते सरकार देखो।।

            मौलिक रचना
          अजय पटनायक

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