*जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़)
*शीर्षक-"गौरैया चिड़ियाँ का दर्द "
*कविता--छ्न्द-मुक्त ।
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***गौरैया चिड़ियाँ का दर्द ***
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गौरैया एक नन्हीं सी चिड़ियाँ,
रहती घर की छत पर,
धीरे से , घोसले में से,
निकल आती,वो मुंडेर पर ।
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दादी माँ के डाले,अन्नों के दाने,
चुगती बड़ी चाव से,
चीं-चीं करती ,फुदक-फुदक करती,
और चौकस होने का,भाव है जगाती ।
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इक दिन आया,उसके जीवन में,
वो सपनों का राजकुमार,
आँखें चार हुयी,
दिन व रातें भी हुयी खुशहाल,
जब देखो,जिधर देखो,दिखते हरदम साथ--साथ ।
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फिर आया,वो भी इक दिन,
गौरैया ने, दिये अण्डे दो ,
रखवाली की अण्डों की खूब,
सपनों का राजकुमार,
करते-रहता, सेवा भरपूर,
फिर हुये ,अण्डों से बच्चें दो ,
एक था नर और एक थी मादा,
बच्चें तो बच्चें हैं,क्या नर और मादा ।
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इक दिन बच्चों के,माँ--बाप,
निकल पड़े,भोजन की तलाश में,
उतने में,वहाँ पर,आ गया,
इक बागड़--बिल्ला ,जब उसने,
बच्चों की, चीं-चीं की आवाज़ जो सुनी
मानो !उसकी शुरु हो गई कहानी ।
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उसने ऐसा कमाल दिखाया,
दोनों का,फिर गला जो दबाया,
और उनको,वहीं पर कच्चा चबाया ।
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पंखों को टुकड़े,बिखेरे इधर-उधर,
और खुद हुआ,वहाँ से,नौ दो ग्यारह,
जब लौटे,उनके माँ-बाप तो,
चीं-चीं की आवाज,न सुनायी दी,
मन में,सन्देह की आशंका जो छायी।
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जैसे ही,अन्दर झाँका,घोसले में,
देखा जो हाल,वहाँ जब उन्होंने,
दिल धक से रह गये--
ना आँखों से,आँसू भी छलक पाये ,
और वो,सो गये,सदा-सदा के लिये ।
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गौरैया एक नन्हीं सी चिड़िया,
रहती थी,घर की छत पर,
अब ये बातें,भूली बिसरी कहानी ,
अफ़सोस भी और उतनी हैरानी ।
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मन बार-बार,यही कहता है कि,
क्या!ताकतवर अक्सर जुल्म करता ,
कमज़ोरों --लाचरों पर,
यहाँ,बच्चें भूखे थे,
और एक ने,यहाँ अपनी,भूख मिटायी।
*****इति ********
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व्याख्या:---कवि ने अपनी रचना के माध्यम से यह यह बताने की कोशिश की है कि एक ताकतवर हमेशा ,कमजोरों पर जुल्म करता है और बेबस सिर्फ़ देखते रह जाता है ।
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