बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _छत्तीसगढ़ के पहिचान
विषय - छतीसगढ़ के सांस्कृतिक विरासत
विधा - कविता
छतीसगढ़ के बोली के मिठास |
अउ तीजा के रोटी हे खास |
भोजली के सुंदर गीत |
अउ इहाँ के मोह प्रीत |
सुआ के नाचा मे मन होते गदगद |
अउ एक घ कहे म इंहा के मनखे मन करथे मदद ||1||
शिवरीनारायण के मेला अउ शबरी के कुटिया |
जेन मेऱ भगवान श्रीराम खाइस बोइर |
इंहा हे श्रीराम के ननिहाल अउ सीता कुंड |
दोस्ती के हे पहिचान सगा अउ मितान |
गोत्र तक के रिश्ता निभाथे अउ मानथे मेहमान ||2||
मेला अउ मड़ई खेल अउ खेलई |
नाग पचमी के दंगल अउ अक्ति के मंगल |
मोर छतीसगढ़ हे खास |
छतीसगढ़ के बोली हे मिठास |
अउ तीजा के रोटी हे खास ||3||
चन्द्रहासनी के मंदिर अउ महानदी के तटिया |
रतनपुर महा माई अउ हे भैरों बाबा |
रामटेकरी अउ घूंटा घाट |
इंहा के बरा चनाचरपट्टी अउ चाट ||4||
भाखा म गुरतुर बोली हे|
अउ बिहाव बर म तक होली हे |
बहुत हे सुघ्घर इंहा के रहई, बसई, पहनाई |
सदा हे जीवन जीई अउ सबके सोचथे भलाई ||5||
अइसे हे मोर छतीसगढ़ के बखान |
इंहा के मनखे मन म होते मेहनत अउ ईमान |
छत्तीसगढ़ के बोली हे मिठास |
अउ तीजा के रोटी हे खास ||6||
भावर्थ _ छतीसगढ़ के संस्कृति, व्यवहार के विशेषता
रचनाकार _ सावित्री यादव "सावि "
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