Thursday, June 4, 2020

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन" की रचना- सुघ्घर माटी

नाम:- कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन"
ब्लॉक:- प्रेमनगर, जिला:- सूरजपुर, छत्तीसगढ़
विधा:- कविता
शीर्षक:- छत्तीसगढ़ के सुघ्घर माटी


छत्तीसगढ़ के सुघ्घर सोंधी माटी,
इंहा हावय मया के खान।
बोली भाखा अब्बड़ गुरतुर लागे,
सुनके अंतस भीतरी आथे जान।
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खेत खार म सुघ्घर धान बाढ़गे,
ओढ़े हरियर चुनरी लहराय।
नदिया तीर म घन अमरैय्या,
उंहा कोयली ह तान सुनाय।
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आनी बानी के रुख लगे,
देख के मन ह हरषाय।
आमा, बिही, जामुन फरे,
रेंगइया मन के जीव ललचाय।
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खनिज संपदा के बड़ भंडार ह,
छत्तीसगढ़ के मान ल बढ़ाय।
धान उपजाय म अव्वल हावय,
तभे धान के कटोरा कहाय।
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आनी बानी के गोदना गोदाय,
रुपिया,करधनिया म अंग ल सजाय।
इंहा के रीति नीति अउ संसकिरीति,
देश दुनिया म नाम कमाय।
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सब देबी मन पहाड़ म बिराजे,
सब भक्तन मन के करय सहाय।
इंखरे आशिरबाद म सुघ्घर रहिके,
अरजी बिनती करत जिनगी ल बिताय।
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सुत उठ के किसनहा बेटा,
माटी म अपन माथ ल नवाय।
दिन रात बनी भूति करके,
दु बखत के रोटी सबो ल खवाय।
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डोंगरी लागय इंहा सरग बरोबर,
महानदी,अरपा देथे निरमल पानी।
सबो जीव मन के प्यास बुझाथे,
बाढ़थे उंखर जिनगानी।
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व्याख्या:- छत्तीसगढ़ के माटी इंहा के प्राकृतिक सौंदर्य, संसकिरीति अउ किसनहा बेटा के वर्णन हावय ये सब मन इंहा के मान ल बढ़ावत हे।

*मौलिक रचना*
कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन"
जिला:- सूरजपुर, छत्तीसगढ़

7 comments:

  1. निरन्तर सुधार, बहुत अच्छा

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  2. लाजवाब मित्र

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  3. बेहतरीन रचना अनुज..खूब आगे बढ़े
    बधाई..👌💐

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