जिला----- जांजगीर-चांपा
राज्य-----छत्तीसगढ़
विधा-----कविता
शीर्षक---- शहर की यादें
व्याख्या-----कवि के द्वारा गांव एवं शहर की तुलना करते हुए वहां के खान पान रहन सहन वातावरण आबादी की समस्याओं की ओर ध्यान खींचा गया है ।
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शहर की यादें
तेरा शहर शहर कहूं,या दुखों का घर ।
देख तुझे मैं सोचूं, तेरा जीवन सफर ।
धूल धुआं आबादी ,नित यहां बढ़ रही ।
सुविधा जितना चाहिए ,निशदिन घट रही ।
रहने की किल्लत है, मंहगाई की मुसीबत है ।
रोजगार में मशीनीकरण ,की आई आफत है
शहर शहर सब रटते,देखा शहरों का ढ़ोंग ।
मुझको ऐसा लग रहा, ऐसे ही होंगे लोग ।
तुझे जेमिनी कहूं या गणेश,दो नाम एक साथ में ।
तू ही बता किसे लिखूं, कागज कलम मेरे हाथ में ।
तेरे पास जो चेक है , मैं नोट समझ बैठा ।
तूने खिलाया रसगुल्ला , मैं केक समझ बैठा ।
चना मुर्रा हम खाते ,ये अपनी पहचान है ।
पिज्जा ,बर्गर ,दोसा ,इडली,ये यहां की शान है
ये शर्बत है कि पानी, तुमने मंगाके थम्हा दिया ।
रख जाऊं या पी जाऊं, ऐसे ही प्यास बुझा दिया ।
तू दाता है कि भिखारी है,आज पता चलेगा ।
एक के बदले सौ लेता है ,कब तक तू छलेगा ।
यहां महानदी है या गंगा , कुछ नहीं कह पाऊंगा ।
दोनों की कृपा मुझ पर इतनी ,सदा शीश झुकाऊंगा।
गिरधारी लाल चौहान
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