जिला-कांकेर,छग
विषय- *सुपर हीरो*
विधा-संस्मरण
जिंदगी अपनी रफ़्तार से बढ़ती है।समय के चरण गति के साथ निरंतर बढ़ते हुए अपनी छाप छोड़ जाते हैं और यह चरण ही इतिहास बन जाता है। अतीत की स्मृतियां को कुरेदना सुखद अहसास भरे भोर में मानों खुशियां को तलाशना है।तब मैं तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। गांव में 5वीं तक की कक्षा थी। गांव धनेसरा दो छोरों से नदियों से घिरा, तीसरे छोर पर पहाड़, चौथे छोर पर पक्की सड़क ,जो सरोना से नरहरपुर जाती थी। महानदी के तट पर पुल निर्माणाधीन था। महीने भर का राशन लेने 7किमी साइकिल से बाबूजी को सरोना जाना पड़ता था। बाबूजी धनेसरा में ही ग्राम सेवक थे। उनके साईकिल में लाईट लगा हुआ था।जो आकर्षण का केंद्र था। परसों तीजा था। मां के कहने पर बाबूजी राशन लेने सरोना जा रहे थे। बरसात है,नाव से नदी पार करना पड़ेगा।नाव की बात सुन मैं जिद करने लगी। मुझे भी ले चलिए।नाव में कभी बैठी नहीं हूं। बाबूजी मुझे ले गये।मुनीम जी ने मुझे बिस्कुट, चाकलेट व मुट्ठी भर काजू खाने को दिए। होटल वाले दादा ने बूंदी खिलाई। मैं पहली बार बाबूजी के साईकिल में सामने बैठी थी। पीछे राशन बंधा था। सुंदर -सुंदर उड़ते पक्षी, पेड़ों के झुरमुट,आम व अमरुद के बगीचे देख मैं बहुत खुश हुई। सुबह नाव पर बैठ कर नदी को निहारना आनंद दायक क्षण था।
दोपहर को लौटते वक्त साईकिल,सामान बहुत से लोग, बाबूजी और मैं।नदी में उफनती जल राशि देख बहुत खुशी हो रही थी।तभी नाव डगमगाने लगा। अचानक बीच धार में नाव पलटी।मै साईकिल के नीचे दब गई।मेरा फ्राक ऊपर दिखाई दे रहा था। बाबूजी तैरते हुए मुझे पकड़ कर ऊपर उठा लिए।एक व्यक्ति साईकिल की निकाला। बाबूजी की घड़ी खराब हो गई थी। महीने भर का सारा राशन नदी में बह चुका था। बाबूजी ने मुझे बचा लिया था।वे मेरे सुपर हीरो थे। मुझे जीवन दान दिए थे।खाली हाथ घर लौटे थे पर मां- बाबूजी बहुत खुश थे। मुझे हंसते हुए देख कर। दूसरे दिन बाबूजी फिर से राशन ले आये थे। मेरे लिए रेवड़ी और किशमिश भी।एक साल बाद महानदी पर पुल बन गया था।आज भी उस घटना को याद कर सिहर जाती हूं।आज मेरे *सुपर हीरो* इस दुनियां में नहीं है किंतु उनकी जिंदादिली आज भी प्रेरित करती है विपरीत परिस्थितियों में हार न मान कर आगे बढ़ने को।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
बहुत अच्छा लिखा है आपने... यह घटना तो बहुत ही ज्यादा रोमांचक है मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए.. और आपके पापाजी वाकई सुपरमैन है जिन्होंने आपको उस उफनती हुई महानदी से बचा लिया
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