Tuesday, June 30, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- आधुनिक परिवेश

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   विधा -  मुक्तछंद कविता 
   विशेष - " आधा तीतर आधा बटेर " मुहावरे का प्रयोग। 
   शीर्षक  -  " आधुनिक परिवेश "
  
   भाव - रचनाकार प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से आधुनिक परिवेश एवं फैशन पर कटाक्ष करते हुए व्यंग्यात्मक वर्णन किया है। 
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    गरीबों की मजबूरी अब, 
    अमीरों की फैशन बन गई है ।
    कटे-फटे जीन्स कपड़ों पर, 
    लोगों का मन अब रम गई है ।।

    आधा तीतर आधा बटेर,
    जीन्स छोटी, ऊपर कपड़ों का ढेर ??? 
    
    सुन्दर-सी सूरत पर ,
    ये कैसा मंजर छाया है।
    किसी के बाल लाल-पीले ,
    तो कोई बेढंगा बाल कटाया है ।।

    आधा तीतर आधा बटेर ,
    कहाँ कश्मीर , कहाँ बीकानेर ।।
  
    सादगी औरत का है आभूषण ,
    आत्मसम्मान ही उसका धन है। 
    लाख लगा लो चेहरे पर मेकअप, नकाब के, 
    पहचान नहीं बनती कभी तन है।। 

    आधा तीतर आधा बटेर,
    चेहरे पर लिपा-पोति का घेर।।


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