जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - मुक्तछंद कविता
विशेष - " आधा तीतर आधा बटेर " मुहावरे का प्रयोग।
शीर्षक - " आधुनिक परिवेश "
भाव - रचनाकार प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से आधुनिक परिवेश एवं फैशन पर कटाक्ष करते हुए व्यंग्यात्मक वर्णन किया है।
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गरीबों की मजबूरी अब,
अमीरों की फैशन बन गई है ।
कटे-फटे जीन्स कपड़ों पर,
लोगों का मन अब रम गई है ।।
आधा तीतर आधा बटेर,
जीन्स छोटी, ऊपर कपड़ों का ढेर ???
सुन्दर-सी सूरत पर ,
ये कैसा मंजर छाया है।
किसी के बाल लाल-पीले ,
तो कोई बेढंगा बाल कटाया है ।।
आधा तीतर आधा बटेर ,
कहाँ कश्मीर , कहाँ बीकानेर ।।
सादगी औरत का है आभूषण ,
आत्मसम्मान ही उसका धन है।
लाख लगा लो चेहरे पर मेकअप, नकाब के,
पहचान नहीं बनती कभी तन है।।
आधा तीतर आधा बटेर,
चेहरे पर लिपा-पोति का घेर।।
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Nice sir ji
ReplyDeleteBahut badiya
ReplyDeleteWahh mama kya sundar tarike se samjhaya hai aapne...👌👌👌👌
ReplyDeleteVery good avismarniy
ReplyDeleteBe Yourself... Very Nice
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