Thursday, June 25, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से मीरा आर्ची चौहान कृत आलेख- शहीद गणेश कुंजाम

लेखिका-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर, छग
शीर्षक- *शहीद  गणेश*    
              *कुंजाम*

लद्दाख के गलवान घाटी इलाके में 15जून 2020 को हुए संघर्ष में जो निहत्थे भारतीय सैनिकों ने अपने से पांच गुना ज्यादा हथियार बंद चीनी सैनिकों का न केवल मुकाबला किया बल्कि दुगुनी संख्या में दुश्मनों को मौत के घाट उतारने वाले जांबाज सिपाहियों में एक नाम छग कांकेर के चारामा ब्लाक छोटे से गांव के शहीद हुए सिपाही गणेश कुंजाम भी हैं ,जिन्होंने हिमालयी शरहदों  में चीन की बर्बरता का सामना करते हुए अपना जीवन भारत माता के आन -बान और शान के लिए कुर्बान कर दिया था।

भारत चीन संघर्ष के इस हिंसक झड़प में गलवान घाटी पर भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे। चीन के सैनिकों ने अपनी बर्बरता का परिचय देते हुए भारतीय जवानों के शव को धारदार हथियारों से छलनी कर दिया था। कांकेर का वीर पुत्र इस संघर्ष में  अपनी कुर्बानी देकर न केवल परिवार बल्कि कांकेर के साथ छग का भी नाम वीर जवानों के क्रम में लिखा गया।छग सरकार उनके सम्मान में उनके गांव के प्राथमिक शाला का नाम उनके नाम पर करने की घोषणा भी की,ताकि गांव का बच्चा -बच्चा जाने कि ये इस गांव का वही वीर पुत्र हैं, जिसने देश के लिए कुर्बानी दी थी। 
कुर्रुटोला से हायर सेकंडरी स्कूल की परीक्षा पास कर यह जवान  सेना में भर्ती हुआ था।9वर्ष तक अपनी सेवाएं दे ,इस वर्ष वैवाहिक जीवन में प्रवेश का सपना देखा था। जनवरी में जब घर आया दुल्हिन भी ढूंढ ली थी।इस बीच 
नया घर भी बनवा रहा था,जिसे बनाने की जिम्मेदारी चाचाजी को दे रखी थी। माता- पिता का इकलौता पुत्र ,दो बहनों का इकलौता भाई, मंगेतर का सुहाग 
पल भर में छीन गया परिवार का सपना। मां की ममता आवाक रह गई।चीख -चीखकर रोती बिलखती बहनें हमेशा के लिए रक्षा बंधन के त्यौहार  को तिलांजलि दे दी थी। सहजीवन की आस लगाए मंगेतर को उनके आने का इंतजार था। शादी के पहले ही शहीद हो चला था उसका होने वाला सुहाग।एक माह पूर्व चाचा को फोन आया कि कल ही पैसे भेज देगा  ताकि घर बनाने का कार्य पूरा हो सके और चीन की सीमा की ड्यूटी से लौट शादी का सपना पूरा कर सके।पर किस्मत को कुछ और मंजूर था।फोन से पता चला उनका चहेता गणेश शहीद हो गया है। टीवी पर प्रसारित समाचारों को देख परिवार के साथ गांव का बुरा हाल था।
रायपुर में कांधा देकर मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मान दिया। पिता को 20लाख का चेक राज्य सरकार की ओर से दिया गया ।साथ ही घर के एक सदस्य को नौकरी का आश्वासन भी।पर यह क्षति अपूर्ण थी।
आवाक थे वृद्ध माता-पिता।
पर गर्वित था देश, राज्य और वह गांव।
*पहले देश की आन, बाद में अपनी जान।*
*शहीद गणेश कुंजाम, तुझे सलाम।*
       के नारे से सारा गांव गूंज उठा था।
कांकेर क्षेत्र के तीनों विधायक, सांसद व तादाद में सैनिक,एस पी , कलेक्टर व जन शैलाब उनके अंतिम दर्शन को उमड़ पड़े थे।
धन्य है वो मां जो ऐसे लाल को जन्म दार्त्री हैं। गणेश कुंजाम की कुर्बानी कभी व्यर्थ नहीं जायेगी। सैकड़ों जवानों के लिए वे मील के पत्थर साबित होंगे।

*शहीदों की चिताओं पर हर* *बरस लगेंगे मेले,*
*देश पर मिटने वालों की बाकी* *यही निशां होगी।*

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग

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