रचनाकार-एच-एस-अरमो" अरमान "
निवास-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
जिला-रायपुर ।
शीर्षक:- "शहीद का परिवार "
विधा--" आलेख "
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====***शहीद का परिवार ***===
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पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ दिनाँक 15 जून,2020 के देर रात सोमवार को 12बजे से लेकर रात 2बजे तक दोनों देशों के बीच आपसी मुठभेड़ की घटना हुयी ।जिसमेँ किसी भी प्रकार के हथियारों का प्रयोग नहीं किया गया है ।किन्तु चीनी सैनिकों द्वारा पत्थरों,लठियों और धारदार चीजों से हमला किया गया था ।आपसी ज़बरदस्त मुठभेड़ में दोनों पक्षों के सैनिक बुरी तरह से घायल और कुछ की तो मौत वहीं पर हो गई थी और कुछ की गलवान नदी में गिर जाने से हुयी थी ।समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई कि भारत के 20सैनिकों ने अपनी शहादत दी है और लगभग 43चीनी सैनिक हताहत भी हुयें हैं ।
अत्यंत दुःख की बात है कि पूर्व सैनिक समझौता के तहत दोनों देशों ने यह तय किया है कि सीमा पर अग्रिम चौकियों पर जो भी सैनिक तैनात होगें,उनके पास या तो हथियार नहीं होगें ।अगर रैंक के मुताबिक अफसरों के पास बन्दूक होगी तो उसका मुँह जमीन की तरफ होगा ।यही वजह है कि एलएसी पर दोनों तरफ के सैनिक निहत्थे एक-दूसरे को अपने इलाके से खदेड़ते हैं ।किसी भी हालत में हथियार का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं ।
इस घटना में सैनिकों की शहादत पर देशभर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है ।यहाँ तक कि कुछ शहरों में कई संगठनों ने प्रदर्शन के बाद चीन के राष्ट्रपति की तस्वीरें भी जला दी गई ।ऐसी तस्वीरें टी वी चैनलों के माध्यम से भी देखने को हम सबको मिली हैं ।
चीन की एक आदत सी पड़ गयी है कि वह हमेशा कहता कुछ है और सामने करता कुछ और है ।इसी कारण से उसकी बातों विश्वास नहीं किया जा सकता है ।इसकी एक मिसाल के तौर पर बताना चाहूँगा की चीन ने हमें 45 साल पहले भी धोका दिया था ।वह तारीख 20अक्टूबर,1975 की है ।उसने अरुणाचल प्रदेश के तुलुँग ला में असम राईफल की पेट्रो लिंग पार्टी पर धोखे से एम्बुश लगाकर हमला किया था,इस वक्त भी भारत के 04 जवान शहीद हुए थे ।वैसे ही सन्1967में भी हिंसक टकराव हुआ था ।चूंकि 1962के युद्ध के करीब पांच साल बाद सितंबर-अक्टूबर 1967में नाथू ला में हुई झड़पों के बाद से भारत और चीन की सेनाओं के बीच यह सबसे बड़ा टकराव है ।उस वक्त भी भारत के 80सैनिक शहीद हुए थे और 300से ज्यादा चीनी सैन्यकर्मी शहीद हुए थे ।
आज पूरा विश्व व हमारा देश कोविड-19 के संकट से निपटने के लिए लगा हुआ है और ऐसे में ही एक आफत अचानक आ गईं है ।मैंने इन बातों को बताकर आपके सामने यह कहना चाहता हूँ कि चीन एक दगाबाज देश है और उसने अपनी दगाबाजी की हरकत कर देश के सामने युद्द-सा वातावरण खड़ा कर दिया है ।
पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई दिनाँक 15जून 20की रात को चीन के साथ भारतीय सैनिकों की मुठभेड़ में छत्तीसगढ़ का भी एक सैनिक ने अपनी शहादत दी है ।जो की कांकेर जिले के चारामा ब्लॉक के कुरुटोला ग्राम पंचायत के आश्रित गांव गिधाली का रहने वाला जवान शहीद गणेश कुन्जाम भी शामिल है ।सेना के अफसरों द्वारा फ़ोन पर दी गई सूचना के बाद गांव में मातम-सा माहौल हो गया ।शहीद जवान 2011में सेना में भर्ती हुआ था और उसकी तैनाती एक माह पहले ही चीन बाँर्ड़र में हुई थी ।उसकी दो बहनें भी हैं ।उसके परिवार और गाँव वालों को उसकी इस शौर्यपूर्ण शहादत पर असीम गर्व है,वे लोग अपनी दिल की बात रखते हुए चाहते हैं कि चीन से इसका बदला लेकर हिसाब चुकता किया जाए,साथ ही कहते हैं कि इतने जवानों की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए ।जब गांव में शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार दिनाँक 18 जून,20 को पहुँचने की खबर सुनते ही आस-पास के गांवों के लोग भी अन्तिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने-अपने तरीके से तैयारियाँ करने लगे ।अपितु प्रशासन स्तर पर जिले में अन्तिम संस्कार की तैयारी भी होना शुरू हो गयी थी ।परिवार के सदस्यों ने बड़े भारी मन से बताया कि गणेश की इस साल शादी भी होने वाली थी ।शहीद के किसान पिता इतवारू राम ने जब अपने इकलौते बेटे की मृत्यु की खबर सुनते ही गहरे सदमें में आ गए थे ।उसके चाचा तिहारु राम ने बताया था कि कश्मीर से एक फोन आया और सूचना दी दी गई थी कि जवान गणेश शहीद हो हैं तो उस वक़्त उन्होंने जवाब दिया कि मुझे अपने भतीजे की शहादत पर बहुत गर्व हैऔर सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए ।चाचा जी ने यह भी बताया कि वह तो फ़रवरी में छुट्टी पर घर पर आया था और उस समय ही उसके शादी के लिए रिश्ता तय कर दिया गया था ।पिछले महीने ही उसने फोन करके बताया था कि उसकी पोस्टिंग दूसरी जगह हो गई है ।इसके बाद से उससे मेरी बात नहीं हुई थी ।
जब रायपुर में शहीद का पार्थिव शरीर हवाईजहाज के द्वारा हवाईअड्डे पर आया तो उस समय राज्य के मुख्यमंत्री व अन्य सभी लोगों को के द्वारा अन्तिम दर्शन किया और अपनी भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की ।उसके बाद उसका पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से उसके गृह-ग्राम के लिए रवाना हो गया और रास्ते में भी लोगों ने अन्तिम दर्शन करते रहे ।शहीद जीवन का अँतिम पड़ाव स्थल उसके गाँव में पूर्ण राजकीय सम्मान से अन्तिम विदाई दी गई ।सारा परिवार,रिश्तेदार व जनमानस बहुत ही भाव-विह्विल हो चले थे ।शासन के द्वारा उस समय सम्मान राशि के रूप में चैक परिवार वालों को दिया गया ।किन्तु परिवार के लिए तो असली पूँजी शहीद गणेश था जो आज इस दुनिया में नहीं रहा है ।कहा भी गया है कि-सैनिक की शहादत कभी बेकार नहीं जाती ,वो लोगों के दिलों में बसा करते हैं और उसके बलिदान से अन्य सभी लोगों को देशभक्ति की प्रेरणा मिलती रहती है ।यही होती है एक शहीद के पराक्रम की कहानी ।
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साभार प्रस्तुति-अरमो,रायपुर,छ.ग-।
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