Monday, June 1, 2020

छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- वीरांगणा

द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़                                                                                
      शीर्षक; "वीरांगना लक्ष्मीबाई"
        विधा; तुकांत कविता
             रस -वीर रस
                   *****
 
मणि के समान चमकता भाल,
वीरांगना मर्दानी मणिकर्णिका।
तलवार कृपाण कटारी ढाल, 
अस्त्र-शस्त्र रण युद्ध साधिका।।

सहस्त्र सेना साहस को लिए,
सारंग सवार सबल वीरबाला।
रक्त रंजित रणभूमि शोभित,
तन ताप तलवार धरे ज्वाला।।

पल-पल पछाड़ती शत्रु सेना,
पवन वेग मर्दानी बढ़ी आगे।।
सुनकर वीरांगना की हुंकार,
शत्रु भयभीत हो रण से भागे।।

सेनानायक बन झलकारिन, 
दुर्गादल की थामें हाथ कमान।
रही हमशक्ल रानी लक्ष्मी की,
शत्रु मार गिराती वज्र समान।।

नाला देख अड़ा घोड़ा नया,
तब क्रूर दुश्मनों ने घेर लिया।
मिटाया खुद को लक्ष्मीबाई ने,
पवित्र देह अग्नि स्नान किया।।
               ******
              

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