Thursday, June 18, 2020

महासमुन्द से द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- सावन

द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़      
 शीर्षक;"सावन मेघ"
विधा:गीत

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दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में पल-पल पिघलना ।।

करे सिंगार धरती पहने हरियाली रंग ।
मौसम मुस्कान धरे भरे हर उर उमंग ।।
बरसे फिर सावन घटा झूमकर हर अँगना ,
दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में .............

नक्षत्र मघा अपने चिर-चरम पर ।
बरसाता पानी वसुधा के तन पर ।।
वो धरा क्या जो न अघाए मघा का बरसना , 
दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में .............

दौड़ती हैं नदियाँ झरे झरने झर-झर ।
देता नीर माह सावन सबको भर-भर ।।
सबको भाता सूर्य का घटा के बीच निकलना , 
दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में पल-पल पिघलना ।।
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             द्रोपती साहू "सरसिज"
           

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