महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"सावन मेघ"
विधा:गीत
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दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में पल-पल पिघलना ।।
करे सिंगार धरती पहने हरियाली रंग ।
मौसम मुस्कान धरे भरे हर उर उमंग ।।
बरसे फिर सावन घटा झूमकर हर अँगना ,
दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में .............
नक्षत्र मघा अपने चिर-चरम पर ।
बरसाता पानी वसुधा के तन पर ।।
वो धरा क्या जो न अघाए मघा का बरसना ,
दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में .............
दौड़ती हैं नदियाँ झरे झरने झर-झर ।
देता नीर माह सावन सबको भर-भर ।।
सबको भाता सूर्य का घटा के बीच निकलना ,
दल मेघों का सावन में लहरा के चलना ।
मदमस्त मस्तानी हवा में पल-पल पिघलना ।।
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द्रोपती साहू "सरसिज"
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