Thursday, June 4, 2020

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- छत्तीसगढ़ महतारी

रचनाकार  सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला  बेमेतरा (छ. ग.)
विधा  कविता
शीर्षक  छत्तीसगढ़ महतारी
                कविता
जय जय छत्तीसगढ़ महतारी,
तोर महिमा हे बड़ भारी।
इंहा के मनखे बड़ सिधवा हे,
नई जाने झूठ लबारी।
इंहा के बोली ह बड़ मिठ लागे,
बड़ मिठास बड़ सादगी।
जय जय छत्तीसगढ़ महतारी...
छत्तीसगढ़ महतारी कहलाते,
धान के कटोरा ।
इही नाम ले सारा जग में,
एखर फैले हे उजियारा।
जय जय छत्तीसगढ़ महतारी...
अभी ले किसान ह जुट गए हे,
धरती मैय्या ला संजोए बर।
रात दिन मेहनत करत हे,
धरती माता के कोरा म।
ईही किसान ह धरती मां ला,
हरियर लुगरा पहिराथे।
रात दिन देख रेख करथे ,
मेहनत करथे किसान मनखे ह। तब जाके लहराथे हरियर,
लुगरा ह माता के।
हरियर हरियर लहराथे धान ह,
त धरती मां अऊ किसान खुश हो जाथे।
जय जय छत्तीसगढ़ महतारी...
छत्तीसगढ़ के देवारी बर,
सुवा गीत बड़ भाथे ।
अऊ किसम कीसम के ठे ठरी खुरमी,
घलो बड़ मिठाथे।
कबार के उही समय किसान मन के,
कोठी हा माता के आशीष ले भर जाथे ।
जय जय छत्तीसगढ़ महतारी,
तोर महिमा हे बड़ भारी...
 सूर्य प्रकाश पाटिल

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